Poem

क्रिकेट और कोर्ट

अधिवक्ता गुरूदास संजीव गोरवाडकर©

Shared by BACA. Ten verses, in Hindi.

स्टेडियम के पिच पर गेंद,

और अदालत में दलील,

बिना धैर्य के दोनों में,

सफलता नहीं हासील…

यहाँ बल्ला बोलता हैं,

वहाँ बोलते हैं वकील,

जीत होती हैं उसी की,

सच्ची हो जिसकी अपील…

अंपायर उठाए उँगली का इशारा,

जज सुनाएँ निर्णय का दायरा…

LBW हो, या SLP का फैसला,

नियमों से बँधा प्रत्येक मसला…

दोनों को लगते हैं Ground,

एक होता हैं Round, दूजा Legally Sound…

दोनों में होता हैं Review का प्रावधान,

दोनों में चलता हैं Commentary का बयान…

गेंदबाज़ फेंके यॉर्कर तेज़,

वकील के तर्कों में Legal Phrase…

बल्लेबाज़ बचाए अपनी विकेट,

मुवक्किल कड़े, मेरा ही कहना Correct…

फील्डर दौड़े पकड़ने कैच,

वकील खोजे सबूत का मैच…

हर रन जैसे बहुमूल्य साक्ष्य,

हर दलील बने निर्णायक पक्ष…

ओवर दर ओवर बढ़ता दबाव,

तारीख पे तारीख, वही प्रभाव…

धैर्य, रणनीति, समय का मान,

दोनों भी जैसे, जंग का मैदान…

स्कोरबोर्ड बताए खेल की चाल,

फाइलों में दर्ज हर एक सवाल…

अंतिम क्षण में यू पलटे बाज़ी,

कभी छक्का, कभी गवाही राजी…

चाहे खेल हो या न्यायदान,

ईमान ही देता असली पहचान…

क्रिकेट सिखाए संतुलन का पाठ,

वकालत दिखाए सत्य का ठाठ…

जहाँ चले नियम—नैतिकता साथ साथ,

वहीं मिलती हैं जीत की सौगात…

क्रिकेट हो या कोर्ट की शान,

न्याय और खेल, दोनों भी महान…

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17 to 24 October 2026, Mumbai.

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